नजरिया

दुनिया को देखने का हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है। गुलाब के पौधे में किसी को फूल नज़र आता है तो किसी को काँटे। जो व्यक्ति जैसा सोचता है, उसे दुनिया वैसी ही नजर आती है। कुछ लोगों को समस्या दिखती है तो कुछ लोगों को हर ओर अवसर। कुछ लोग जन्मदिन पर दुखी होते हैं कि उम्र कम हो गई तो कुछ खुश होते है कि एक शानदार साल बीता और एक शानदार साल सामने है। अपनी सोच के अनुसार चीजें नज़र आती हैं और वैसी ही घटती हैं। चार अंधे एक राजा के दरबार में गए। राजा ने उन्हें एक हाथी दिया और कहा–’जिसका तुम स्पर्श कर रहे हो, उसका वर्णन करो।’ जो व्यक्ति पूँछ की तरफ खड़ा था, उसने कहा कि हाथी रस्सी की तरह होता है। जो व्यक्ति पैर की तरफ़ खड़ा था, उसने कहा कि हाथी पेड़ के मोटे तने की तरह होता है। जो व्यक्ति सूंड की तरफ़ था, उसने कहा कि हाथी साँप की तरह होता है। जो व्यक्ति पेट की तरफ था, उसने कहा, हाथी मोटी दीवार की तरह होता है और चारों बहस में उलझ पड़े। सार यह है कि हर व्यक्ति हर वस्तु और घटना को अपने नज़रिए से देखता है। एक व्यक्ति किसी के लिए बुरा हो सकता है तो किसी के लिए अच्छा। एक ही वस्तु या मुद्दे के बारे में विभिन्न लोगों की विभिन्न राय होती हैं और सब अपना राग अलापते हुए अड़े रहते हैं। इसलिए अपने नज़रिए पर काम कीजिए, यदि आपका नज़रिया सुख ढूँढ़ने वाला होगा, तो सुख स्वयं ही आपका साथी बन जाएगा।

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