बचपन से बुढ़ापा

आधी उम्र जी लेने के बाद एहसास होता है कि आज तक जो भी हमने किया है, कमाया है सब कुछ बहुत कम पड़ रहा है..ऐसा कुछ भी नहीं जो पर्याप्त है हमारे पास, और एक समय है जो भागा जा रहा है बहुत तेज गति से..इस उम्र में आने के बाद लगने लगता है कि हमने कितना कुछ पीछे छोड़ दिया है जो कि सबसे जरूरी था हमारे लिए, उसे संजो कर रखना आखिर कितना जरूरी था ये बड़ी लगने वाली छोटी सी जिंदगी का गुजर बसर करने के लिए..!!

बचपन छूट गया फिर स्कूल छूट गया जैसे तैसे लगा की अब कॉलेज में मजे करेंगे तो वो समय और जल्दी बीता बाकी वक्त के मुकाबले में, हमने अपने लड़कपन में अपना पहला प्यार खो दिया, पहला प्यार छूट जाना पूरी जिंदगी अखरता है..फिर ये समय अचानक एक बोझ साथ ले आता है..जिम्मेदारियों का..!! मिडिल क्लास लौंडे का जीवन 22–24 की उम्र में ही उसे वहां लाकर खड़ा कर देता हैं जहां हमें कम से कम 30 की उम्र में होना चाहिए था..

खैर इस सब के बीच एक सबसे बड़ी बात और सबसे बोझिल होता है अपने बाप को अपनी आंखो के सामने बूढ़े होते देखना..बाप के वो मजबूत कंधे जो पूरे परिवार को अकेले सम्हाल लिया करते थे अब उनकी बाजुओं में वो ताकत भी न होना की वो तुम्हारी हथेली थाम कर ही कुछ दूर तक चल सकें…
बाप के गिरते हुए दांत तुम्हें एहसास कराते हैं कि बाप अब तुमसे धीरे धीरे दूर जा रहा है..ये वह समय होता है जब लाखों खटास हों बाप बेटे के रिश्ते में लेकिन लौंडे को समझना चाहिए कि अब उसे बाप से सारे गिले शिकवे दूर कर लेने चाहिए..!!

सब कुछ भूलकर कुछ समय उनके साथ बिताना चाहिए रोज..उनकी गलत बात को भी सही मान लेना चाहिए कम से कम उनके सामने ही..अगर वो तुमसे मार्केट से कुछ लाने कहते हैं तो बिना सवाल करे बस वो चीज उनके हाथों में होनी चाहिए शाम को..अगर हम एक कप चाय बना रहे हैं तो उनसे बिना ये पूछे कि “क्या आप चाय पियेंगे”, बस उनके सामने रख देना चाहिए..जैसे जैसे बाप बूढ़ा होगा, उसकी वो सारी ताकत तुम्हारे भीतर आएंगी, क्युकी अब तुम उनकी जगह ले रहे होगे अपने वंश के लिए..

बाप को बूढ़े होते देखना और उसे रोज फील करना बहुत अजीब अनुभव है..ये वही समय है जब बस हमें उनके लिए वो सब करना चाहिए जो उन्होंने हमारे लिए कभी किया था.. हालाकी हम चाह कर भी उनके जितना नही कर सकते, दुनिया का सबसे रईस बेटा भी अपने बाप के लिए वो सब नही कर सकता है जो उसके बाप ने उसके लिए किया होगा..लेकिन हम इतना तो कर सकते हैं कि उनको हमेशा ये पता रहे की उनका बेटा/बेटी उनके लिए हर समय तत्पर हैं..उसे ये एहसास करा सकते हैं कि हमने उनकी जिम्मेदारियों का बोझ अपने कंधे पर ले जरूर लिया है, पर अभी भी हमारी औकात नहीं की हम उनकी जगह ले सकें..
बाप, बाप होता है..♥️

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